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किसने किया नेहरू-गाँधी ब्रांड का वध?

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किसने किया नेहरू-गाँधी ब्रांड का वध?

    25-Jun-2019

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” 

अश्विनीकुमार मिश्र- संपादक,निर्भय पथिक
ashva_m@hotmail. com
कांग्रेस का अस्तित्व संकट में नजर आ रहा है। यह हाल के चुनावी हार से ज्यादा पार्टी के ब्रांड का संकट है। संसद में शपथ ग्रहण के दौरान पार्टी के सुप्रीमो राहुल गाँधी का व्यवहार जिस तरह का दिखा उससे लगता है कि उनपर पार्टी की हार की बौखलाहट कुछ ज्यादा हावी हो गयी है। उन्होंने सदन में जो व्यवहार किया वह बचकानी हरकत नहीं कही जा सकती, यह एक खीज का प्रदर्शन था। पार्टी की यह हालत देख कर लगता नहीं कि उन्होंने हार से कोई सबक लिया है। यह भी कि एक सौ साल से भी अधिक की पार्टी आज अपनी पहचान क्यों खोती जा रही है। एक ज़माने में पंडित नेहरू, सरदार पटेल जैसे राज नेता, इंदिरा गाँधी और राजीव गाँधी जैसे आधुनिक नेता और मनमोहन सिंह जैसे अर्थ शास्त्री की पार्टी आज मुस्लिम तुष्टिकरण, बामपंथी समाजवादियों और राष्ट्रविरोधी विचारों का अड्डा बन गया है। कांग्रेस आज एक बूढ़े आदमी की तरह गुस्सा, हर चीज के प्रति नफरत का भाव लेकिन कोई समाधान न देने वाली संस्था में परिवर्तित हो गयी है। उसी कांग्रेस ने जिसने देश को एक से बढ़कर एक प्रधान मंत्री दिए उसके पास एक युवा नेता है लेकिन उसकी छवि को ग्रहण किसने लगाया इसकी खोज जरूरी है। इसके लिए कौन जिम्मेदार है?

इसके लिए कुछ खूसट कांग्रेसी नेता मणिशंकर अय्यर, जयराम रमेश, मधुसूदन मिस्त्री, मोहन प्रकाश, ललित माकन, सुरजेवाला, सैम पित्रोदा जैसे कांग्रेसी कर्णधारों का नाड़ी परीक्षण करना जरूरी है। ये सभी कांग्रेस के नीति निर्धारक तथाकथित इंटेलेक्चुअल हैं जिन्होंने समय समय पर कांग्रेस की डूबती नैया में और भी सेंध लगाने का काम किया। इस में सबसे आगे हैं मणि शंकर अय्यर। वे इंदिरा गाँधी, राजीव गाँधी के जमाने से कांग्रेस के खासम ख़ास हैं। बेहद घमडी, अहंकारी, बेतुके विचारों के धनी जिन्होंने मोदी पर चायवाला कटाक्ष कर भाजपा के लिए रास्ता साफ़ कर दिया। उनकी तुगलकी जुबान ने देश भर में मोदी के प्रति सहानुभूति पैदा कर दी और नतीजा सामने है। उसी तरह गुजरात चुनाव के समय भी नरेंद्र मोदी को नीच कहकर कांग्रेस की जीत के रथ को अटका दिया। ये वैसे नेता है जो 2009 में कांग्रेस की लहर में चुनाव हार गए थे। उनपर तरस खाकर उन्हे यूपीए-2 में मंत्री बनाया गया लेकिन झगड़ालु अय्यर साहब सबसे भिड़ लिए। ये वही सज्जन हैं जिन्होंने कॉमन वेल्थ गेम में हुए घोटाले का शिगूफा छोड़कर कांग्रेस पर भ्रष्टाचार का पहाड़ ढ़ा दिया था। और इस मुद्दे को भाजपा ने लपक लिया था।

इस क्रम में दूसरे नंबर पर है जयराम रमेश, जिनका कोई जनाधार नहीं है। बामपंथी विचार के इस कांग्रेसी ने यूपीए सरकार के सभी विकास कार्यक्रम में किसी न किसी प्रकार का अड़ंगा डाला। और उसपर से नीतिगत पक्षाघात का विशेषण उछाल कर सरकार को लज्जित कराया। इनके किताबी ज्ञान ने कांग्रेस और देश की समस्या के लिए कोई समाधान तो नहीं दिया पर कांग्रेस को सत्ता से उतारने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इसी तरह दो बामपंथी समाजवादी विचार के कांग्रेसी मधुसूदन मिस्त्री और मोहन प्रकाश ने कांग्रेस की जड़ें खोदने का काम किया। ये आधारहीन परजीवी नेता को राहुल गाँधी का ख़ास माना जाता है और इन्हें पार्टी की ओर से बड़ी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गयी लेकिन ये दोनों जहाँ भी गए कांग्रेस को नुकसान ही पहुँचाया। कहा जा रहा है समाजवाद और साम्यवाद को एक पैमाने में उतारने की कोशिश में कांग्रेस का बंटाधार हो गया। उसका ब्रांड ख़तम हो गया। चर्चा तो यह भी है कि पार्टी को जनाधारहीन नेताओं ने ज्यादा बर्बाद किया. इसके बाद की रही सही कसर पार्टी के मीडिया प्रबंधकों ने पूरी कर दी।

राहुल गाँधी के कर्रीबी ललित माकन को यूपीए-2 में मिडिया प्रभारी बनाया गया। इनकी पोल भठूरे ने खोल दी। क्योंकि वे भठूरे खा कर अनशन पर बैठने जा रहे थे। ये महोदय पार्टी का मीडिया संबंध बढ़ाने की बजाये तत्कालीन सूचना प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी से पुरानी अदावत निभा रहे थे। एक तरह से वह पार्टी के अंदर ही अपने एक मंत्री के खिलाफ जंग छेड़ रहे थे। इस कारण पूरा मीडिया कांग्रेस के खिलाफ हो गया। और छवि खराब होनी शुरू हो गयी,जो नित नए घोटालों के कारण कांग्रेस को बदनाम कर रही थी। इस में एक और युवा तुर्क कांग्रेसी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने काफी योगदान किया है। वह पार्टी की छवि मीडिया में सुधारने के बदले, अपनी चमकाने में लगे रहे। इस कारण मीडिया में गाँधी विरोधी भावना तैरने लगी। खुद राहुल गाँधी जेएनयू में जाकर टुकड़े टुकड़े गैंग के रहनुमा बन गए। पार्टी के नेता संजय निरुपम ने तो हद ही कर दी, जब वे टीवी पर आकर सर्जिकल स्ट्राइक का सबूत मांगने लगे। इस से तो कांग्रेस की जो भद्द हुई वह अवर्णनीय है। सोमवार को संसद में इस क्रम में एक और नाम जुड़ गया अधीर रंजन दास का। इन महोदय ने कल संसद में प्रधानमंत्री मोदी को गन्दी नाली कहकर कीचड़ अपनी पार्टी पर ही उडेल दिया इस कीचड़ में भाजपा फिर कमल खिलाएगी।”
 

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