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राष्ट्रपति ने संबोधित किया जेएनयू के छात्रों को!

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केएचएल न्यूज ब्युरो
 
hegdekiran17@gmail.com
 
“भारत के सभी क्षेत्रों से और सभी तबकों से छात्र बेहतर शिक्षा के लिए जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय आते हैं, जहां उत्कृष्टता के लिए समान अवसर का वातावरण है। अलग-अलग क्षेत्रों में कॅरियर बनाने की महत्वाकांक्षाओं को संजोए छात्र जेएनयू में एक साथ होते हैं। जेएनयू के चौथे वार्षिक दीक्षांत समारोह को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से संबोधित करते हुए भारतीय राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने यह बातें कहीं। उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय समरसता, विविधता और उत्कृष्टता का प्रतीक है। केन्द्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ इस कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित हुए।”
 
“राष्ट्रपति ने इस अवसर पर कहा कि जेएनयू में भारतीय संस्कृति के सभी रंग प्रतिबिंबित होते हैं। इस विश्वविद्यालय में भवनों, छात्रावासों और सड़कों के नाम और यहां मिलने वाली सुविधाएं भारतीय विरासत से ली गई हैं। यह भारत के भौगोलिक और सांस्कृतिक स्वरूप को सर्वोत्तम रूप में प्रतिबिंबित करता है। यह भारतीयता जेएनयू की विरासत रही है और इसे और अधिक सशक्त करना इस संस्थान का कर्तव्य है।”
 
“राष्ट्रपति ने कहा कि जेएनयू में उत्कृष्ट शिक्षक हैं जो स्वतंत्र परिचर्चा और विपरीत विचारों का सम्मान करते रहे हैं। यहाँ छात्रों को सीखने की प्रक्रिया के दौरान साझीदार समझा जाता है जोकि उच्चतर शिक्षण संस्थान में होना चाहिए। यह विश्वविद्यालय, कक्षाओं से बाहर विश्वविद्यालय परिसर में मौजूद कैफेटेरिया, ढाबा इत्यादि पर व्यापक रूप में निरंतर होते रहने वाली परिचर्चा और बहस के लिए भी जाना जाता है।”
 
“भारत की शानदार प्राचीन शिक्षा और शोध परंपराओं का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि वर्तमान समय में उभरने वाली चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए हम तक्षशिला, नालंदा, विक्रमशिला और वल्लभी विश्वविद्यालयों से प्रेरणा प्राप्त कर सकते हैं। जिन्होंने शिक्षा और शोध के क्षेत्र में उच्च मानदंड स्थापित किए थे। इन शिक्षण संस्थानों में दुनिया भर से विशिष्ट ज्ञान प्राप्त करने के लिए विद्वान और छात्र आते रहे। उस प्राचीन व्यवस्था में भी कई आधुनिक तत्व थे जिसने चरक, आर्यभट्ट, चाणक्य,पाणिनि, पतंजलि, गार्गी, मैत्रेयी और तिरुवल्लुवर जैसे महान विद्वान पैदा किए। इन्होंने चिकित्सा विज्ञान, गणित, खगोलशास्त्र, व्याकरण और सामाजिक विकास के क्षेत्रों में अमूल्य योगदान दिए। भारत के इन विद्वानों द्वारा लिखे गए साहित्य का दुनिया के विभिन्न देशों के अध्येताओं ने अपनी-अपनी भाषाओं में अनुवाद किया ताकि सीखने की और ज्ञान अर्जित करने की प्रक्रिया को आगे भी जारी रखा जा सके। आज के विद्वानों को भी इसी तरह के मौलिक ज्ञान केंद्र विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए, जो समसामयिक वैश्विक चुनौतियों से निपटने में मददगार हो सकें। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में जेएनयू ऐसे ही संस्थान में से एक है जो उत्कृष्ट वैश्विक शिक्षण संस्थानों के समकक्ष आता है।”
 
कोविड-19 महामारी की स्थितियों के बीच जेएनयू के 15 अलग-अलग स्कूलों और शिक्षा केंद्रों से विभिन्न विषयों में 603 छात्रों को विद्यावाचस्पति यानी पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई।

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