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गड्ढों वाला महानगर!

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गड्ढों वाला महानगर!

    17-Sep-2019

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अश्विनीकुमार मिश्र
संपादक, निर्भय पथिक
nirbhaypathik@gmail.com
 
 
मुंबई की सडकों पर बन रहे गडढे जानलेवा बनते जा रहे हैं। पिछले एक दशक से मुंबई महानगर की सडकों पर गड्ढों का साम्राज्य है। इस कारण यहाँ की सड़कें खतरनाक हो गयी हैं। जब भी मुंबई में मानसून का मौसम आता है दो चीजें होना सामान्य बात है पहला जल जमाव और दूसरा सड़कों पर गडढो का उगना। इस कारण मुंबई का जीवन बुरी तरह प्रभावित होता है। ट्रैफिक जाम की समस्या उत्पन्न हो जाती है। कभी कभी यह जानलेवा बन जाती है। मुंबई में १९०० किलोमीटर लम्बी सड़क की देखभाल महानगरपालिका के हाथों में है। मनपा के बजट में मूलभूत संरचना पर प्रति वर्ष ३००० करोड़ रुपये खर्च करती है। यहाँ तककी मनपा का सालाना बजट ३०,००० करोड़ रूपये का है।
 
 
पिछले १० वर्षों में मुंबई में सड़क निर्माण पर करोड़ों रूपये खर्च किये गए हैं। ताकि मुंबई की सडकों को गड्ढा मुक्त रखा जा सके। इस वर्ष मुंबई की सडकों पर १० जून से १० सितंबर के बीते ३ माह में ३६४९ गड्ढे हुए। यह आंकड़ा मनपा के ऐप पर आयी शिकायतों के आधार पर है। मनपा के पास ऐसी कोई यंत्रणा नहीं है जिस से शहर में कितने गडढे हैं जिसका मनपा आंकलन कर सके। २००९ से मनपा मुंबई के सडकों के गड्ढे निपटाने का काम कर रही है। तब मनपा ने ९६३ गड्ढे निपटाए थे और यह संख्यां आज बढ़कर ४९८२ तक पहुँच गयी है। इस हिसाब से सोंचें तो मुंबई में एक किलोमीटर पर ३ गड्ढों का हिसाब निकलता है। इस से यह पता चलता है कि मनपा मुंबईकरों की शिकायत पर निर्भर है। जबकि असलियत कुछ और ही है।
 
 

 
 
 
आज मुंबई की सडकों पर घूमा जाये तो वहां गड्ढे ही गड्ढे हैं। एक किलोमीटर में औसतन ५०० गड्ढे तो जरूर होंगे। उस हिसाब से मुंबई की १९०० किलोमीटर में कमसे कम १०,००० गड्ढे होने का अनुमान है। मनपा ने इन गड्ढों से निपटने के लिए सडकों की संरचना में कई परिवर्तन किये हैं। कोलतार की सडकों को सीमेंट की सडकों में बदला है। इस कारण यहाँ की कुछ सड़कें अच्छी हालत में हैं। लेकिन गड्ढों का साम्राज्य कम नहीं हो रहा है। मुंबई के दो मुख्य महामार्ग पर इन दिनों गड्ढों का साम्राज्य है। मनपा ने मुंबई के गड्ढों से निपटने के लिए कई तरह के रसायनों का प्रयोग किया है। इसके लिए ऑस्ट्रिया और इस्रायल से सड़क के गड्ढों को भरने का रसायन मंगाया है। इस रसायन का उपयोग फिलहाल कारगर है। गड्ढे को भरने की जो प्रक्रिया अपनायी जाती है वह फूल प्रूफ नहीं है। दरअसल सड़क निर्माण को लेकर नयी तकनीक अपनाने के कई प्रयास हुए हैं लेकिन इसमें निरीक्षण की कमी और ब्याप्त भ्रष्टाचार के कारण मुंबई की सड़कें गड्ढों में डूब गयी हैं। और यह लगातार कई वर्षों से हो रहा है।
 
 
धीरे धीरे गड्ढों की समस्या बढती ही जा रही है। और अब यह जानलेवा बनता जा रहा है। तथा इन गड्ढों के कार ट्रैफिक जाम होने से वहां प्रदूषण की समस्या भी बढ़ रही है। उस पर से सरकार ने नया मोटर वाहन एक्ट लागू कर मुंबईकरों की दुखती रग को छेड़ दिया है। एक ओर मनपा मुंबईकरों के पैसे गड्ढे बुझाने में बर्बाद कर रही है दूसरी ओर सरकार सड़क कानून के तहत नागरिकों को दण्डित कर रही है.. यह विरोधाभासी स्थिति बदलनी चाहिए। तभी मुंबई की सडकों को गड्ढा मुक्त हो सकता है।”

 
 
अश्विनीकुमार मिश्र
“संपादक, निर्भय पथिक”
nirbhaypathik@gmail.com

 
 
“मुंबई की सडकों पर बन रहे गडढे जानलेवा बनते जा रहे हैं। पिछले एक दशक से मुंबई महानगर की सडकों पर गड्ढों का साम्राज्य है। इस कारण यहाँ की सड़कें खतरनाक हो गयी हैं। जब भी मुंबई में मानसून का मौसम आता है दो चीजें होना सामान्य बात है पहला जल जमाव और दूसरा सड़कों पर गडढो का उगना। इस कारण मुंबई का जीवन बुरी तरह प्रभावित होता है। ट्रैफिक जाम की समस्या उत्पन्न हो जाती है। कभी कभी यह जानलेवा बन जाती है। मुंबई में १९०० किलोमीटर लम्बी सड़क की देखभाल महानगरपालिका के हाथों में है। मनपा के बजट में मूलभूत संरचना पर प्रति वर्ष ३००० करोड़ रुपये खर्च करती है। यहाँ तककी मनपा का सालाना बजट ३०,००० करोड़ रूपये का है।”
 
 
पिछले १० वर्षों में मुंबई में सड़क निर्माण पर करोड़ों रूपये खर्च किये गए हैं। ताकि मुंबई की सडकों को गड्ढा मुक्त रखा जा सके। इस वर्ष मुंबई की सडकों पर १० जून से १० सितंबर के बीते ३ माह में ३६४९ गड्ढे हुए। यह आंकड़ा मनपा के ऐप पर आयी शिकायतों के आधार पर है। मनपा के पास ऐसी कोई यंत्रणा नहीं है जिस से शहर में कितने गडढे हैं जिसका मनपा आंकलन कर सके। २००९ से मनपा मुंबई के सडकों के गड्ढे निपटाने का काम कर रही है। तब मनपा ने ९६३ गड्ढे निपटाए थे और यह संख्यां आज बढ़कर ४९८२ तक पहुँच गयी है। इस हिसाब से सोंचें तो मुंबई में एक किलोमीटर पर ३ गड्ढों का हिसाब निकलता है। इस से यह पता चलता है कि मनपा मुंबईकरों की शिकायत पर निर्भर है। जबकि असलियत कुछ और ही है।
 
 

 
 
 
“आज मुंबई की सडकों पर घूमा जाये तो वहां गड्ढे ही गड्ढे हैं। एक किलोमीटर में औसतन ५०० गड्ढे तो जरूर होंगे। उस हिसाब से मुंबई की १९०० किलोमीटर में कमसे कम १०,००० गड्ढे होने का अनुमान है। मनपा ने इन गड्ढों से निपटने के लिए सडकों की संरचना में कई परिवर्तन किये हैं। कोलतार की सडकों को सीमेंट की सडकों में बदला है। इस कारण यहाँ की कुछ सड़कें अच्छी हालत में हैं। लेकिन गड्ढों का साम्राज्य कम नहीं हो रहा है। मुंबई के दो मुख्य महामार्ग पर इन दिनों गड्ढों का साम्राज्य है। मनपा ने मुंबई के गड्ढों से निपटने के लिए कई तरह के रसायनों का प्रयोग किया है। इसके लिए ऑस्ट्रिया और इस्रायल से सड़क के गड्ढों को भरने का रसायन मंगाया है। इस रसायन का उपयोग फिलहाल कारगर है। गड्ढे को भरने की जो प्रक्रिया अपनायी जाती है वह फूल प्रूफ नहीं है। दरअसल सड़क निर्माण को लेकर नयी तकनीक अपनाने के कई प्रयास हुए हैं लेकिन इसमें निरीक्षण की कमी और ब्याप्त भ्रष्टाचार के कारण मुंबई की सड़कें गड्ढों में डूब गयी हैं। और यह लगातार कई वर्षों से हो रहा है।”
 
 
धीरे धीरे गड्ढों की समस्या बढती ही जा रही है। और अब यह जानलेवा बनता जा रहा है। तथा इन गड्ढों के कार ट्रैफिक जाम होने से वहां प्रदूषण की समस्या भी बढ़ रही है। उस पर से सरकार ने नया मोटर वाहन एक्ट लागू कर मुंबईकरों की दुखती रग को छेड़ दिया है। एक ओर मनपा मुंबईकरों के पैसे गड्ढे बुझाने में बर्बाद कर रही है दूसरी ओर सरकार सड़क कानून के तहत नागरिकों को दण्डित कर रही है.. यह विरोधाभासी स्थिति बदलनी चाहिए। तभी मुंबई की सडकों को गड्ढा मुक्त हो सकता है।

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