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कश्मीर की हालत के लिये नेहरू जिम्मेदार – रविशंकर प्रसाद

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कश्मीर की हालत के लिये नेहरू जिम्मेदार – रविशंकर प्रसाद

    14-Sep-2019

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केएचएल न्यूज ब्युरो
 
केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि, कश्मीर की हालत के लिये जवाहरलाल नेहरू जिम्मेदार हैं। उन्हीं ने कश्मीर को हमेशा से अलग-थलग रखने का प्रयास किया। जबकि सरदार पटेल कश्मीर को भारतीय संविधान के दायरे में रखने के पक्षधर थे। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मजबूत फैसले और गृहमंत्री अमित शाह के इच्छा शक्ति के आगे कश्मीर में अब भारत के समान कानून लागू हुआ है।
 
 
कानून मंत्री ने कहा कि तीन तलाक का मामला मुस्लिम महिलाओं को भारत की सभी महिलाओं की बराबरी में रखने का प्रयास है। इसे धर्म के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। कानून मंत्री ने यह भी कहा कि आने वाले कुछ ही समय में भारत में ऑल इंडिया जुडिशल सर्विस शुरू की जाएगी ताकि न्याय व्यवस्था सुचारू एवं अधिक सक्षम रूप से मामले निपटाने में समर्थ हो सके।
 
 
केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद शुक्रवार की शाम मुंबई में अधिनियम फाउंडेशन के कार्यक्रम में बोल रहे थे। मुंबई विश्वविद्यालय की कॉन्वोकेशन हॉल में आयोजित इस आयोजन में मुंबई भाजपा के अध्यक्ष मंगल प्रभात लोढ़ा समारोह अध्यक्ष थे। कार्यक्रम में मुंबई के कई जाने-माने वकील, कानून के छात्र एवं प्रसिद्ध विधिवेत्ताओं सहित मुंबई विश्वविद्यालय के कुलपति भी मंच पर उपस्थित थे।
 
 
कश्मीर से धारा ३७० हटाने के मामले पर कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि मैं सरदार पटेल को सेल्यूट करना चाहता हूं, क्योंकि उन्होंने देश की ५६५ रियासतों को मिलाया। लेकिन पंडित जवाहरलाल नेहरू ने कश्मीर राज्य को भारतीय कानून से अलग रखा। सरदार पटेल हमेशा से कश्मीर को भारत की मुख्य धारा से जोड़ने रखने के पक्षधर थे। लेकिन आज़ादी के तत्काल बाद नेहरू नहीं माने और कश्मीर को धारा ३७० के भरोसे सौंपकर सालों तक इस अनुच्छेद का दुरुपयोग होने दिया। यहां तक कि वहां पर बालविवाह कानून भी लागू नहीं होने दिया। केंद्रीय कानून मंत्री ने यह भी कहा कि आजादी के बाद कश्मीर में अब तक केंद्र से १६ लाख करोड़ रुपए की सहायता दी गई। लेकिन यह सारा पैसा कश्मीर के विकास के बजाय वहां के कुछ लोगों की जेब में जाता रहा।
 
 
अधिवक्ताओं कानून के जानकारों और कानून के छात्रों को संबोधित करते हुए रविशंकर प्रसाद ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत में यह पहली सरकार है जो कानूनी सुधार के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसी प्रतिबद्धता के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुस्लिम महिलाओं को न्याय देने का रास्ता निकाला, इसी कारण इस देश की करोडों मुस्लिम महिलाओं को अपने प्रधानमंत्री मोदी जी पर गर्व है, क्योंकि उन्होंने उनके समर्थन में एक बड़ा कदम उठाया है।
 
 
 
कानून मंत्री ने कहा कि भारत के संविधान का जब निर्माण हो रहा था तो संविधान सभा में यह बात उठी कि क्या भारत की सांस्कृतिक विरासत को भुला दिया जाए, तब पेंटर नंदलाल बोस ने भगवान श्री राम के अयोध्या वापसी का चित्र बनाया था, जिसे संविधान में स्थान दिया गया। इसके साथ ही भगवान श्री कृष्ण, हनुमानजी, और महावीर के भी चित्र है। लेकिन आज अगर भारत का संविधान बनता, तो तथाकथित सेकुलर लोग संविधान में इन महान लोगों को जगह तक नहीँ देते।”

 
 

 
 
 
केएचएल न्यूज ब्युरो

 
“केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि, कश्मीर की हालत के लिये जवाहरलाल नेहरू जिम्मेदार हैं। उन्हीं ने कश्मीर को हमेशा से अलग-थलग रखने का प्रयास किया। जबकि सरदार पटेल कश्मीर को भारतीय संविधान के दायरे में रखने के पक्षधर थे। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मजबूत फैसले और गृहमंत्री अमित शाह के इच्छा शक्ति के आगे कश्मीर में अब भारत के समान कानून लागू हुआ है।”
 
 
कानून मंत्री ने कहा कि तीन तलाक का मामला मुस्लिम महिलाओं को भारत की सभी महिलाओं की बराबरी में रखने का प्रयास है। इसे धर्म के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। कानून मंत्री ने यह भी कहा कि आने वाले कुछ ही समय में भारत में ऑल इंडिया जुडिशल सर्विस शुरू की जाएगी ताकि न्याय व्यवस्था सुचारू एवं अधिक सक्षम रूप से मामले निपटाने में समर्थ हो सके।
 
 
“केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद शुक्रवार की शाम मुंबई में अधिनियम फाउंडेशन के कार्यक्रम में बोल रहे थे। मुंबई विश्वविद्यालय की कॉन्वोकेशन हॉल में आयोजित इस आयोजन में मुंबई भाजपा के अध्यक्ष मंगल प्रभात लोढ़ा समारोह अध्यक्ष थे। कार्यक्रम में मुंबई के कई जाने-माने वकील, कानून के छात्र एवं प्रसिद्ध विधिवेत्ताओं सहित मुंबई विश्वविद्यालय के कुलपति भी मंच पर उपस्थित थे।”
 
 
“कश्मीर से धारा ३७० हटाने के मामले पर कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि मैं सरदार पटेल को सेल्यूट करना चाहता हूं, क्योंकि उन्होंने देश की ५६५ रियासतों को मिलाया। लेकिन पंडित जवाहरलाल नेहरू ने कश्मीर राज्य को भारतीय कानून से अलग रखा। सरदार पटेल हमेशा से कश्मीर को भारत की मुख्य धारा से जोड़ने रखने के पक्षधर थे। लेकिन आज़ादी के तत्काल बाद नेहरू नहीं माने और कश्मीर को धारा ३७० के भरोसे सौंपकर सालों तक इस अनुच्छेद का दुरुपयोग होने दिया। यहां तक कि वहां पर बालविवाह कानून भी लागू नहीं होने दिया। केंद्रीय कानून मंत्री ने यह भी कहा कि आजादी के बाद कश्मीर में अब तक केंद्र से १६ लाख करोड़ रुपए की सहायता दी गई। लेकिन यह सारा पैसा कश्मीर के विकास के बजाय वहां के कुछ लोगों की जेब में जाता रहा।”
 
 
“अधिवक्ताओं कानून के जानकारों और कानून के छात्रों को संबोधित करते हुए रविशंकर प्रसाद ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत में यह पहली सरकार है जो कानूनी सुधार के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसी प्रतिबद्धता के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुस्लिम महिलाओं को न्याय देने का रास्ता निकाला, इसी कारण इस देश की करोडों मुस्लिम महिलाओं को अपने प्रधानमंत्री मोदी जी पर गर्व है, क्योंकि उन्होंने उनके समर्थन में एक बड़ा कदम उठाया है।”
 
 
 
“कानून मंत्री ने कहा कि भारत के संविधान का जब निर्माण हो रहा था तो संविधान सभा में यह बात उठी कि क्या भारत की सांस्कृतिक विरासत को भुला दिया जाए, तब पेंटर नंदलाल बोस ने भगवान श्री राम के अयोध्या वापसी का चित्र बनाया था, जिसे संविधान में स्थान दिया गया। इसके साथ ही भगवान श्री कृष्ण, हनुमानजी, और महावीर के भी चित्र है। लेकिन आज अगर भारत का संविधान बनता, तो तथाकथित सेकुलर लोग संविधान में इन महान लोगों को जगह तक नहीँ देते।”

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