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मोदी का राजीव कार्ड!
01-Jul-2019
”
अश्विनीकुमार मिश्र – संपादक, निर्भय पथिक
[email protected] com
लोकसभा चुनाव के छठे ओर सातवें चरण के चुनाव से पहले राजनीतिक दलों ने अति उत्साह में आकर नागल प्रलाप शुरू कर दिया। इसमें बाजी मोदी के हाथ में चली गयी। छठे सत्र के चुनाव प्रचार के दौरान नरेंद्र मोदी ने राजीव कार्ड खेल कर सभी विपक्षियों को जबरदस्त रूप से झकझोर दिया है। मोदी को मालूम था कि अंतिम चरण के चुनाव में पंजाब दिल्ली और कुछ ऐसे इलाके हैं जहां सिख मतदाता महत्वपूर्ण हैं। मोदी ने दिवंगत राजीव गांधी को मिस्टर क्लीन की आड़ में सबसे भ्रष्टाचारी कह कर आम जनों की नाराजगी मोल ले ली। लेकिन इसकी आड़ में वह जो साधना चाहते थे उसकी चर्चा हर ओर वायरल हो गयी है। पंजाब से दिल्ली तक राजीव गांधी और उनसे जुड़ी घटनाओं को उभार कर मोदी-शाह पुराने घावों को उभारने में सफल हो गए, इस जाल में कांग्रेस फंस गई और इस फांस को सैम पित्रोदा ने और भी मजबूत कर दिया यह कर कि 1984 में जो हुआ सो हुआ.. उनके इस कथन या बयान ने देश के सिख समुदाय में नया जलजला पैदा कर दिया है।
इस से सभी राजनीतिक दल मोदी के पीछे पड़ गए और दिवंगतों के प्रति अनादर करने का आरोप लगा रहे हैं, ओर इस बात का जितना भी मड़गिनजन हो रहा है उस से विपक्ष सहानुभूति की आस लगाए बैठी है क्योंकि आमजनों की नजर में राजीव गांधी अच्छे नेता थे, लेकिन इतिहास कभी पीछा नही छोड़ता और इंदिरा गांधी के निधन के बाद सिख दंगा और उनका बयान कि बड़े पेड़ के गिरने से धरती कांपती ही है। सिख संहार के इस दर्द में राजीव गांधी का तत्कालीन बयान जहर में जहर घोल गया था। मोदी के राजीव कार्ड के बाद अब चुनाव के छठे चरण में नई हलचल पैदा कर गया है। छठे चरण में जिन सीटों पर चुनाव होना है वहां की अधिकांश सीटों पर भाजपा का कब्जा है कांग्रेस इन सीटों को भाजपा से छिनना चाहती है, इसलिए मोदी ने ऐसी चल चली की सिख दंगों की पीड़ा बाहर आ गयी और आक्रामक कांग्रेस को बैकफुट पर जाना पड़ा। वैसे भी पांचवे चरण के चुनाव के बाद से सभी राजनीतिक दलों में घबराहट है क्योंकि मतदान का प्रतिशत ठीक नहीं रहा, इसलिए छठे चरण के चुनाव में राजीव कार्ड खेल कर मोदी ने नई राजनीतिक गर्माहट पैदा कर दिया है। देखना है कि छठें चरण में मतदान का ऊंट किस करवट बैठता है। मोदी का नया दांव क्या गुल खिलाता है।”
“अश्विनीकुमार मिश्र – संपादक, निर्भय पथिक
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लोकसभा चुनाव के छठे ओर सातवें चरण के चुनाव से पहले राजनीतिक दलों ने अति उत्साह में आकर नागल प्रलाप शुरू कर दिया। इसमें बाजी मोदी के हाथ में चली गयी। छठे सत्र के चुनाव प्रचार के दौरान नरेंद्र मोदी ने राजीव कार्ड खेल कर सभी विपक्षियों को जबरदस्त रूप से झकझोर दिया है। मोदी को मालूम था कि अंतिम चरण के चुनाव में पंजाब दिल्ली और कुछ ऐसे इलाके हैं जहां सिख मतदाता महत्वपूर्ण हैं। मोदी ने दिवंगत राजीव गांधी को मिस्टर क्लीन की आड़ में सबसे भ्रष्टाचारी कह कर आम जनों की नाराजगी मोल ले ली। लेकिन इसकी आड़ में वह जो साधना चाहते थे उसकी चर्चा हर ओर वायरल हो गयी है। पंजाब से दिल्ली तक राजीव गांधी और उनसे जुड़ी घटनाओं को उभार कर मोदी-शाह पुराने घावों को उभारने में सफल हो गए, इस जाल में कांग्रेस फंस गई और इस फांस को सैम पित्रोदा ने और भी मजबूत कर दिया यह कर कि 1984 में जो हुआ सो हुआ.. उनके इस कथन या बयान ने देश के सिख समुदाय में नया जलजला पैदा कर दिया है।
इस से सभी राजनीतिक दल मोदी के पीछे पड़ गए और दिवंगतों के प्रति अनादर करने का आरोप लगा रहे हैं, ओर इस बात का जितना भी मड़गिनजन हो रहा है उस से विपक्ष सहानुभूति की आस लगाए बैठी है क्योंकि आमजनों की नजर में राजीव गांधी अच्छे नेता थे, लेकिन इतिहास कभी पीछा नही छोड़ता और इंदिरा गांधी के निधन के बाद सिख दंगा और उनका बयान कि बड़े पेड़ के गिरने से धरती कांपती ही है। सिख संहार के इस दर्द में राजीव गांधी का तत्कालीन बयान जहर में जहर घोल गया था। मोदी के राजीव कार्ड के बाद अब चुनाव के छठे चरण में नई हलचल पैदा कर गया है। छठे चरण में जिन सीटों पर चुनाव होना है वहां की अधिकांश सीटों पर भाजपा का कब्जा है कांग्रेस इन सीटों को भाजपा से छिनना चाहती है, इसलिए मोदी ने ऐसी चल चली की सिख दंगों की पीड़ा बाहर आ गयी और आक्रामक कांग्रेस को बैकफुट पर जाना पड़ा। वैसे भी पांचवे चरण के चुनाव के बाद से सभी राजनीतिक दलों में घबराहट है क्योंकि मतदान का प्रतिशत ठीक नहीं रहा, इसलिए छठे चरण के चुनाव में राजीव कार्ड खेल कर मोदी ने नई राजनीतिक गर्माहट पैदा कर दिया है। देखना है कि छठें चरण में मतदान का ऊंट किस करवट बैठता है। मोदी का नया दांव क्या गुल खिलाता है।”

